मैं रोज की तरह आज सुबह 6:00 उठा,मैं अपने शरीर को सही रखने के लिए थोड़ा देर तक व्यायाम की,उसके बाद मैं नहाने के बाद आकर सुबह का नाश्ता की.आज का नाश्ता में मैं रोटी और सब्जी की शुरुआत की,नाश्ता करने के बाद मैं घर में फोन किया और अपने बेटा से थोड़ा देर तक बात की.अपने बेटा से बात करने के बाद मैं अपने भतीजी से बात की.मेरा भतीजी सबसे छोटी है अभी उसकी बात करने का अंदाज बहुत प्यारा लगता है.इसीलिए मैं उसे रोज सुबह और शाम दो टाइम बात करता हूं.
सबसे पहले वह घर के सभी सदस्य के बारे में शिकायत करती है.इसकी शिकायत सबसे मजेदार और प्यारा लगता है.मेरा भतीजी सबसे ज्यादा प्यार उसकी भाई से करती है.उसकी सामने उसकी भाई को कोई डांट नहीं सकता.उसका बाद उसकी जो भी ख्वाहिश मुझ बताती है.मेरा भतीजी की प्यारी सी बात सुनने के बाद मेरा दिन भर का दिन चर्चा खुशी से चलती है.
उसके बाद अपनी पत्नी से थोड़ा देर तक बात हम करते हैं.बच्चे लोग का पढ़ाई और घर को संभालने की जिम्मेदारी का ऊपर में हम दोनों बात करते हैं.बातों के बीच में दोनों एक दूसरे के हालात का बारे में पूछ लेते हैं.यह जिंदगी का सफर इतना कठिन हो चुका है कि हम एक दूसरे को इतना समय नहीं दे पाते.मेरा घर की जिम्मेदारी और उसकी बच्चों की परवरिश में समय निकल जाता है.
उसके बाद में अपना काम में निकल जाता हूं.मैं अपने काम को सही तरीका से करते रहता हूं.ताकि मेरा काम में कोई शिकायत ना कर पाए. मैं अपने स्टाफ से अच्छा से बात करता हूं मेरा किसी के साथ कोई मतभेद नहीं रहता है.जो हमको टारगेट दिया जाता है दिन भर का उसको पूरा करने के लिए हम लोग पूरा लगन के साथ कोशिश करते रहते हैं.अपनी सहकर्मियों के साथ थोड़ा हंसी मजाक भी चलता रहता है.अगर अपने सहकर्मियों से थोड़ा हंसी मजाक नहीं करेंगे तो जिंदगी का मतलब ही कुछ नहीं है.हां ज्यादा ही हंसी मजाक बहुत हानिकारक होता है.हंसी मजाक ऐसा होना चाहिए कि सामने वाले का दिल को कोई ठोस ना पहुंचे.
दोपहर के खाना अपने कैंटीन में सारे स्टाफ के साथ हम लोग मिलकर खाते हैं.कोई खाने के टेबल में बहुत सारे बातें चीज हम लोग करते रहते हैं.किसी को कोई दिक्कत परेशानी के ऊपर में हम सब मिलकर बातचीत करते हैं.
हम लोग 12 स्टेट का स्टाफ सब मिलकर रहते हैं. सबका भाषा अलग-अलग है. सबका पहनना अलग-अलग है.सबका खान-पान अलग-अलग है.परंतु हम लोग सब मिलकर एक भाईचारा के नाते रहते हैं.अगर कोई बीमार है तो सब मिलकर उसका ख्याल रखते हैं.
दोपहर खाने के बाद सब अपने-अपना काम में लग जाते हैं अपनी टारगेट को पूरा करने में,दैनिक दोपहर 4:00 बजे अपना मीटिंग होता है.और उसमें आने वाला कल के बारे में बात किया जाता है कल का टारगेट अपना क्या रहेगा.
उसके बाद हम अपना काम खत्म करके रूम आते हैं.
फ्रेश होने के बाद हम अपना घर में बात करते हैं बीवी बच्चों से बात करने के बाद तब हम खाना खाते हैं.हम रात का खाना हल्का खाते हैं रोटी और सब्जियों के साथ.खाना खाने के बाद हम अपना रूम में आकर अपना ब्लॉग लिखता हूं.और अपना यूट्यूब चैनल में मैं वीडियो डालता हूं.और मैं कुछ कहानी और कविता लिखकर अपना स्टोरी मिरर और प्रतिलिपि में अपलोड करता हूं.
मैं अपने दोस्त लोग से रोज थोड़ा बात करता हूं. मेरा जितना भी बचपन का दोस्त एक-दो को छोड़कर बाकी सब मेरे संपर्क में है.मैं हर रोज एक दोस्त से जरूर बात करता हूं.सही में बोला जाए दोस्त का बिना यह जिंदगी अधूरा रहता है.यह सब करने के बाद में मैं रात में सो जाता हूं.और नया सुबह का इंतजार करता हूं.यह तो था मेरा दैनिक जिंदगी का कहानी.
अब मैं आपको मेरा बचपन के बारे में बताने जा रहा हूं.
♥️♥️ मेरा बचपन♥️♥️
मेरी मां ने मुझे 7 साल की उम्र में मेरी मौसी का घर में छोड़ दिया था.मौसी का घर में हम लोग भाई बहन मिलकर छे रहते थे.मेरी मौसी का चार लड़की और एक लड़के थे.मेरा बचपन का पहला स्कूल था पूरी डेल्टा स्कूल.पूरी डेल्टा स्कूल में 2 साल पढ़ाई करने के बाद हम सब गांव आ गए. गांव पहुंचने के बाद हम सब का एडमिशन नागपुर स्कूल में हुआ.
नागपुर स्कूल में क्लास सिक्स पास करने के बाद हम क्लास 7 में अपना गांव आ गया.1 साल अपना गांव का स्कूल में पढ़ाई करने के बाद हमने पूरी जिला स्कूल में क्लास 8 में एडमिशन हुआ.सही में देखा जाए पूरी जिला स्कूल में 3 साल मेरा लिए एक महत्वपूर्ण समय था.पुरी जिला स्कूल में मेरा बहुत दोस्त आज तक मेरा संपर्क में है. जब हमारा 10th क्लास कंप्लीट हुआ आगे की पढ़ाई करने के लिए मेरा चेहरे में एक बड़ा सा मुस्कान.और दोस्त लोग से दूर होना और स्कूल लाइफ को हमेशा के लिए भूल जाना वह जितना बड़ा दुख था वह हम कभी नहीं भूलेंगे.
मेरे स्कूल लाइफ में जितने भी दोस्त थे वह मेरे लिए एक-एक हीरे की तरह है. मैं बचपन में थोड़ा शरारती था मगर दोस्त लोग से कभी झगड़ा नहीं करता था. सबसे मजेदार विषय हमारे स्कूल ग्राउंड में एक मटर घुगनी का दुकान था. वह एक प्लेट को 50 पैसे लेता था और एक प्लेट को ₹1 लेता था. फर्क बस इतना ही था वह ₹1 वाला प्लेट में थोड़ा पापड़ डालता था .जब खाने का छुट्टी होता था हम सब भाग के दौड़ के जाते थे कौन सबसे पहले जाकर खाएगा. वह दिन सबसे मजेदार पल था. हम जब स्कूल में था तो हमेशा सोचता था स्कूल लाइफ कब खत्म होगा . सच बताऊं दोस्त मेरा स्कूल लाइफ जब खत्म हुआ कुछ दिन के लिए तो अच्छा लगा और उसकी बात मेरे को एहसास हुआ अगर जिंदगी में सबसे गोल्डन लाइफ था तो स्कूल लाइफ. स्कूल जिंदगी में मेरा सबसे अच्छा मन पसंदीदा खेल था गुल्ली डंडा. मगर स्कूल में मैं खो-खो खेल में भाग लेता था. खाली उतना ही नहीं मैं नाभि में भी पार्टिसिपेट किया था. सबसे मजेदार था नाभि में परेड खत्म होने के बाद समोसा और रसगुल्ला मिलता था.क्योंकि मैं थोड़ा खाने का शौकीन था. स्कूल लाइफ खत्म होने के बाद सारे दोस्त एक दूसरे से अलग हो गए.
धीरे-धीरे उम्र बढ़ता गया और पढ़ाई का जिम्मेदारी भी,और उसके बाद नौकरी का तलाश. और उसका बाद शादी और परिवार का जिम्मेदारी धीरे-धीरे समय के साथ दोस्त लोग से दूर कर दिया. फिर भी जब दोस्त का प्यार सच्चा होता है तब कहीं ना कहीं मुलाकात हुई जाता है.मेरा स्कूल लाइफ का दोस्त लोग का साथ 25 साल का बाद मुलाकात हुआ वह भी सोशल मीडिया से. वह पल हम इतना खुश था कि क्या बताऊं.
यहीं से मेरा जीवन शुरू होता है,👉
मेरे दूसरे भाग के लिए बने रहें.
मेरा जीवन का यह ब्लॉग आपको कैसा लगा कमेंट में जरूर बताइएगा.
🙏🙏🙏
ReplyDeleteThank you
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